श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 199
 
 
श्लोक  3.4.199 
प्रभु कहे, - “सनातन, ना मानिह दुःख ।
तोमार आलिङ्गने आमि पाइ बड़ सुख” ॥199॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने आगे कहा, "मेरे प्रिय सनातन, दुःखी मत हो, क्योंकि जब मैं तुम्हें गले लगाता हूँ तो मुझे वास्तव में बहुत खुशी मिलती है।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, “O dear Sanatana, do not be sad, for when I embrace you, I indeed feel great happiness.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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