दीक्षा - काले भक्त करे आत्म - समर्पण ।
सेइ - काले कृष्ण तारे करे आत्म - सम ॥192॥
अनुवाद
“दीक्षा के समय, जब कोई भक्त भगवान की सेवा में पूरी तरह से समर्पित हो जाता है, तो कृष्ण उसे अपने समान ही स्वीकार करते हैं।
“At the time of initiation, when the devotee completely surrenders himself to the service of the Lord, then Krishna accepts him as being as good as himself.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥