श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 189
 
 
श्लोक  3.4.189 
वासुदेव - गलत्कुष्ठी, ताते अङ्ग - कीड़ा - मय ।
तारे आलिङ्गन कैला हा सदय ॥189॥
 
 
अनुवाद
"आपने कोढ़ी वासुदेव को गले लगाया, जिनका शरीर कीड़ों से पूरी तरह ग्रस्त था। आप इतने दयालु हैं कि उनकी इस हालत के बावजूद आपने उन्हें गले लगाया।"
 
"You embraced Vasudeva the leper, whose body was completely infested with worms. You are so kind that you embraced him despite his condition."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)