श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 188
 
 
श्लोक  3.4.188 
हरिदास कहे , - “तुमि ईश्वर दया - मय ।
तोमार गम्भीर हृदय बुझन ना याय” ॥188॥
 
 
अनुवाद
हरिदास ठाकुर बोले, "हे महाराज, आप पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान हैं और हम पर अत्यंत दयालु हैं। आपके अगाध स्नेहमय हृदय में जो है, उसे कोई नहीं समझ सकता।
 
Haridasa Thakura said, "O Sir, you are the Supreme Personality of Godhead and are extremely kind to us. No one can know what is in your deeply loving heart."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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