श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 183
 
 
श्लोक  3.4.183 
प्रभु हासि’ कहे, - “शुन, हरिदास, सनातन ।
तत्त्वतः कहि तोमा - विषये यैछे मोर मन” ॥183॥
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य मुस्कुराए और बोले, "सुनो, हरिदास और सनातन। अब मैं सच कह रहा हूँ कि मेरा मन तुममें कितना आसक्त है।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu laughed and said, "O Haridas, O eternal one, listen. Now I am telling you the truth about how my heart is attracted to you all."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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