श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 182
 
 
श्लोक  3.4.182 
आमा - सब अधमे ये करियाछ अङ्गीकार ।
दीन - दयालु - गुण तोमार ताहाते प्रचार ॥182॥
 
 
अनुवाद
"हे प्रभु, हम सब पतित हैं, परन्तु आपने पतितों पर दया करने के अपने गुण के कारण हमें स्वीकार किया है। यह बात पूरे विश्व में सर्वविदित है।"
 
"O Lord, we are all fallen, but you have accepted us because of your quality of being merciful to the fallen. This is world-famous."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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