‘प्राकृत’ हैले ह तोमार वपु नारि उपेक्षिते ।
भद्राभद्र - वस्तु - ज्ञान नाहिक ‘प्राकृते’ ॥174॥
अनुवाद
“यदि तुम्हारा शरीर भौतिक भी होता, तो भी मैं उसकी उपेक्षा नहीं कर सकता था, क्योंकि भौतिक शरीर को न तो अच्छा माना जाना चाहिए और न ही बुरा।
Even if your body were physical, I would not be able to ignore it, because the physical body should be considered neither good nor bad.
तात्पर्य
श्री चैतन्य महाप्रभु ने सनातन गोस्वामी से कहा कि '' आप एक वैष्णव है | इसलिये आपका शरीर भौतिक न होकर आध्यात्मिक है | इसलिए आपको इस शरीर को श्रेष्ठ और निकृष्ट गुणों के अधीन नहीं समझना चाहिये | इसके अलावा, मैं एक संन्यासी हूँ | इसलिए भले ही आपका शरीर भौतिक ही क्यों न हो, एक संन्यासी को अच्छे शरीर और बुरे शरीर में कोई भेद नहीं देखना चाहिए |
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥