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श्लोक 3.4.171  |
यद्यपि काहार ‘ममता’ बहु - जने हय ।
प्रीति - स्वभावे काहाते कोन भावोदय ॥171॥ |
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| अनुवाद |
| “यद्यपि व्यक्ति का स्नेह अनेक व्यक्तियों के प्रति होता है, फिर भी उसके व्यक्तिगत संबंधों की प्रकृति के अनुसार विभिन्न प्रकार के आनंदमय प्रेम जागृत होते हैं। |
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| “Although a person may have affection for many persons, different kinds of affection arise according to the nature of their personal relationships.” |
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