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श्लोक 3.4.15  |
महाप्रभु देखिते ताँर उत्कण्ठित मन ।
हरिदास कहे , - “प्रभु आसिबेन एखन” ॥15॥ |
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| अनुवाद |
| सनातन गोस्वामी श्री चैतन्य महाप्रभु के चरणकमलों के दर्शन के लिए बहुत उत्सुक थे। इसलिए हरिदास ठाकुर ने कहा, "भगवान शीघ्र ही यहाँ आ रहे हैं।" |
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| Sanatana Goswami was very eager to see the lotus feet of Sri Chaitanya Mahaprabhu. |
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