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अनुवाद
सनातन गोस्वामी ने उत्तर दिया, "आपने मुझे बहुत अच्छी सलाह दी है। मैं अवश्य वहाँ जाऊँगा, क्योंकि भगवान ने मुझे यही स्थान निवास के लिए दिया है।"
Sanatana Goswami replied, "You have given me very good advice. I will certainly go there, because that is the place Mahaprabhu has given me for my stay."
तात्पर्य
प्रभु-दत देश शब्द बहुत महत्वपूर्ण है। श्री चैतन्य महाप्रभु का भक्ति संप्रदाय एक स्थान पर न बैठने और संपूर्ण विश्व में भक्ति संप्रदाय को फैलाने की शिक्षा देता है। भगवान ने वृंदावन में पवित्र स्थलों का उत्खनन और नवीनीकरण करने और वहाँ से भक्ति के संप्रदाय की स्थापना के लिए सनातन गोस्वामी और रूप गोस्वामी को भेजा था। इसलिए व्रिंदावन को उनकी निवास स्थान के रूप में सनातन गोस्वामी और रूप गोस्वामी को दिया गया था। इसी प्रकार, श्री चैतन्य महाप्रभु के भक्ति संप्रदाय के प्रत्येक व्यक्ति को आध्यात्मिक गुरु के शब्दों को स्वीकार करना चाहिए और इस प्रकार कृष्णभावना आंदोलन का प्रसार करना चाहिए। उन्हें हर जगह, दुनिया के सभी हिस्सों में जाना चाहिए, उन स्थानों को अपने प्रभु दत्त देश के रूप में स्वीकार करते हुए, जो आध्यात्मिक गुरु या भगवान कृष्ण द्वारा निवास स्थान के रूप में दिए गए हैं। आध्यात्मिक गुरु भगवान कृष्ण के प्रतिनिधि हैं; इसलिए जिसने आध्यात्मिक गुरु के आदेशों का पालन किया है, वह कृष्ण या श्री चैतन्य महाप्रभु के आदेशों का पालन करने वाला माना जाता है। श्री चैतन्य महाप्रभु पूरी दुनिया में भक्ति पंथ का प्रसार करना चाहते थे (पृथ्वीते आछे यता नगरदि ग्राम)। इसलिए, कृष्णभावना के अनुयायियों को आध्यात्मिक गुरु के अनुसार विश्व के विभिन्न भागों में जाकर प्रचार करना चाहिए। इससे श्री चैतन्य महाप्रभु संतुष्ट होंगे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥