श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  3.4.141 
पण्डित कहे , - “तोमार वास - योग्य वृन्दावन” ।
रथ - यात्रा देखि ताहाँ करह गमन ॥141॥
 
 
अनुवाद
जगदानंद पंडित ने कहा, "आपके निवास के लिए सबसे उपयुक्त स्थान वृंदावन है। रथयात्रा उत्सव देखने के बाद आप वहाँ लौट सकते हैं।"
 
Jagadananda Pandit said, "The most suitable place for you to stay is Vrindavan. You can return there after witnessing the Rath Yatra festival."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)