श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  3.4.128 
शुनि’ महाप्रभु मने सन्तोष पाइला ।
तुष्ट हुआ ताँरे किछु कहिते लागिला ॥128॥
 
 
अनुवाद
यह सब विवरण सुनकर श्री चैतन्य महाप्रभु अत्यन्त प्रसन्न होकर इस प्रकार बोले।
 
Hearing all this, Sri Chaitanya Mahaprabhu became very happy and spoke like this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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