श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  3.4.122 
प्रभु कहे, - “कोन्पथे आइला, सनातन ?” ।
तेंह कहे, - “समुद्र - पथे, करिलॅ आगम न” ॥122॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान ने पूछा, "आप किस रास्ते से आये हैं?" तो सनातन गोस्वामी ने उत्तर दिया, "मैं समुद्र तट के रास्ते से आया हूँ।"
 
When Mahaprabhu asked, “Which way did you come?” Sanatana Goswami replied, “I came by the seashore.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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