श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  3.4.116 
ज्यैष्ठ - मासे प्रभु ग्रमेश्वर - टोटा आइला ।
भक्त - अनुरोधे ताहाँ भिक्षा ये करिला ॥116॥
 
 
अनुवाद
मई-जून के उस महीने में, श्री चैतन्य महाप्रभु यमेश्वर [भगवान शिव] के बगीचे में आए और भक्तों के अनुरोध पर वहाँ प्रसाद ग्रहण किया।
 
In the month of May-June, Sri Chaitanya Mahaprabhu came to the garden of Yameshwar (Lord Shiva) and accepted the Prasad there on the request of the devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)