श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 108-110
 
 
श्लोक  3.4.108-110 
अद्वैत, नित्यानन्द, श्रीवास, वक्रेश्वर ।
वासुदेव, मुरारि, राघव, दामोदर ॥108॥
पुरी, भारती, स्वरूप, पण्डित - गदाधर ।
सार्वभौम, रामानन्द, जगदानन्द, शङ्कर ॥109॥
काशीश्वर, गोविन्दादि व्रत भक्त - गण ।
सबा - सने सनातनेर कराइला मिलन ॥110॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने इन और अन्य चयनित भक्तों को सनातन गोस्वामी का परिचय दिया: अद्वैत आचार्य, नित्यानंद प्रभु, श्रीवास ठाकुर, वक्रेश्वर पंडित, वासुदेव दत्त, मुरारी गुप्ता, राघव पंडित, दामोदर पंडित, परमानंद पुरी, ब्रह्मानंद भारती, स्वरूप दामोदर, गदाधर पंडित, सर्वभौम भट्टाचार्य, रामानंद राय, जगदानंद पंडित, शंकर पंडित, काशीश्वर और गोविंद।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu had Advaita Acharya, Nityananda Prabhu, Srivasa Thakur, Vakreshwar Pandit, Vasudev Dutt, Murari Gupta, Raghava Pandit, Damodar Pandit, Parmananda Puri, Brahmananda Bharati, Swaroop Damodar, Gadadhar Pandit, Sarvabhaum Bhattacharya, Ramananda Rai, Jagadananda Pandit, Shankar Pandit, Kashishwar and Govind. And introduced Sanatan Goswami to other selected devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)