श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  3.4.107 
वर्षार चारि - मास रहिला सब निज भक्त - गणे ।
सबा - सङ्गे प्रभु मिलाइला सनातने ॥107॥
 
 
अनुवाद
बंगाल से आये भगवान के भक्त वर्षा ऋतु के चार महीनों के दौरान जगन्नाथ पुरी में रहते थे, और भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने उन सभी से सनातन गोस्वामी का परिचय कराया।
 
Mahaprabhu's devotees from Bengal stayed in Jagannath Puri for four months during the rainy season and Sri Chaitanya Mahaprabhu introduced Sanatana Goswami to them.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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