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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 3: अन्त्य लीला
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अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट
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श्लोक 104
श्लोक
3.4.104
एइ - मत दुइ - जन नाना - कथा - रङ्गे ।
कृष्ण - कथा आस्वादय र हि’ एक - सङ्गे ॥104॥
अनुवाद
इस प्रकार वे दोनों कृष्ण-विषयक विषयों पर चर्चा करते हुए अपना समय व्यतीत करते थे। इस प्रकार उन्होंने साथ-साथ जीवन का आनन्द लिया।
Thus, they spent their time discussing stories about Krishna. Thus, they enjoyed life together.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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