श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  3.4.101 
प्रत्यह कर तिन - लक्ष नाम - सङ्कीर्तन ।
सबार आगे कर नामेर महिमा कथन ॥101॥
 
 
अनुवाद
“मेरे प्रिय महोदय, आप प्रतिदिन 300,000 बार पवित्र नाम का जप कर रहे हैं और सभी को ऐसे जप के महत्व से अवगत करा रहे हैं।
 
“Oh Sir, you chant the name three lakh times daily and tell everyone about the importance of such chanting.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)