श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.4.10 
ताते यदि एइ देह भाल - स्थाने दिये ।
दुःख - शान्ति हय आर सद्गति पाइये ॥10॥
 
 
अनुवाद
“अतः यदि मैं इस शरीर को अच्छे स्थान पर त्याग दूँ तो मेरा दुःख कम हो जाएगा और मैं उच्च गति को प्राप्त हो जाऊँगा।
 
“Therefore, if I surrender this body to a good place, my suffering will be removed and I will attain higher salvation.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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