श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  3.20.78 
सब श्रोता वैष्णवेर वन्दिया चरण ।
चैतन्य - चरित्र - वर्णन कैलुँ समापन ॥78॥
 
 
अनुवाद
अतः मैं अपने समस्त वैष्णव पाठकों के चरणकमलों में सादर प्रणाम करके श्री चैतन्य महाप्रभु के चरित्रों का यह वर्णन समाप्त करता हूँ।
 
I will conclude this description of the character of Sri Chaitanya Mahaprabhu by paying my respectful obeisance to the lotus feet of all my Vaishnava readers.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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