श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  3.20.65 
प्रभुर ‘शिक्षाष्टक’ - श्लोक येइ पड़े, शुने ।
कृष्णे प्रेम - भक्ति तार बाड़े दिने - दिने ॥65॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई व्यक्ति श्री चैतन्य महाप्रभु के इन आठ श्लोकों का पाठ करता है या सुनता है, तो कृष्ण के प्रति उसका प्रेम और भक्ति दिन-प्रतिदिन बढ़ती जाती है।
 
If a person recites or listens to these Shikshashtak verses written by Sri Chaitanya Mahaprabhu, his love and devotion for Krishna increases day by day.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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