श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.20.36 
नयनं गलदश्रु - धारया वदनं गद्गद - रुद्धया गिरा ।
पुलकैर्निचितं वपुः कदा तव नाम - ग्रहणे भविष्यति ॥36॥
 
 
अनुवाद
"मेरे प्रिय प्रभु, कब मेरी आँखें आँसुओं से भरकर सुशोभित होंगी जो निरंतर आपके पवित्र नाम का जप करते हुए बहते रहेंगे? कब मेरी वाणी लड़खड़ा जाएगी और मेरे शरीर के सारे रोंगटे दिव्य आनंद से खड़े हो जाएँगे जब मैं आपका पवित्र नाम जपूँगा?"
 
"O Lord, when will my eyes be filled with flowing tears and adorned with the chanting of Your holy name? When will my speech be choked with transcendental ecstasy and my body be filled with thrills while chanting Your holy name?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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