श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  3.20.120 
द्वादशे - जगदानन्देर तैल - भञ्जन ।
नित्यानन्द कैला शिवानन्देरे ताड़न ॥120॥
 
 
अनुवाद
बारहवें अध्याय में वर्णन है कि किस प्रकार जगदानंद पंडित ने तेल का बर्तन तोड़ा और किस प्रकार भगवान नित्यानंद ने शिवानंद सेना को दंडित किया।
 
The twelfth chapter describes the breaking of the oil pot by Jagadananda Pandit and the chastisement of Shivananda Sen by Lord Nityananda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)