श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  3.20.116 
नवमे - गोपीनाथ - पट्टनायक - मोचन ।
त्रिजगतेर लोक प्रभुर पाइल दरशन ॥116॥
 
 
अनुवाद
नौवें अध्याय में वर्णन है कि किस प्रकार गोपीनाथ पटनायक का उद्धार हुआ और किस प्रकार तीनों लोकों के लोग श्री चैतन्य महाप्रभु के दर्शन कर पाए।
 
The ninth chapter mentions the salvation of Gopinath Patnaik and the vision of Sri Chaitanya Mahaprabhu by the three worlds.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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