श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  3.20.113 
दामोदर - स्वरूप - ठाञि ताँरे समर्पिल ।
‘गोवर्धन - शिला’, ‘गुञ्जा - माला’ ताँरे दिल ॥113॥
 
 
अनुवाद
उस अध्याय में यह भी बताया गया है कि किस प्रकार भगवान ने रघुनाथ दास गोस्वामी को स्वरूप दामोदर गोस्वामी की देखभाल में सौंप दिया तथा रघुनाथ दास को गोवर्धन पर्वत से एक पत्थर तथा छोटे शंखों की एक माला भेंट की।
 
That chapter also describes how Mahaprabhu placed Raghunatha Dasa Goswami under the protection of Swarupa Damodara Goswami and gave him a stone from Govardhana mountain and a garland of ghuguchi (small conch shells).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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