श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  3.20.112 
षष्ठे - रघुनाथ - दास प्रभुरे मिलिला ।
नित्यानन्द - आज्ञाय चिड़ा - महोत्सव कैला ॥112॥
 
 
अनुवाद
छठे अध्याय में वर्णन किया गया है कि किस प्रकार रघुनाथदास गोस्वामी ने श्री चैतन्य महाप्रभु से भेंट की तथा नित्यानंद प्रभु के आदेशानुसार चावल उत्सव मनाया।
 
The sixth chapter describes the meeting of Raghunath Das Goswami with Sri Chaitanya Mahaprabhu and the celebration of the Chiura festival on the orders of Nityananda Prabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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