श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.20.11 
नाम - सङ्कीर्तन हैते सर्वानर्थ - नाश ।
सर्व - शुभोदय, कृष्ण - प्रेमेर उल्लास ॥11॥
 
 
अनुवाद
"भगवान कृष्ण के पवित्र नाम का जप मात्र करने से ही सभी अवांछनीय आदतों से मुक्ति मिल सकती है। यह समस्त सौभाग्य को जागृत करने और कृष्ण के प्रति प्रेम की लहरों के प्रवाह को आरंभ करने का साधन है।"
 
Chanting the name of Lord Krishna alone can free one from all undesirable habits. This is a means to bring forth all good fortune and initiate the flow of waves of Krishna's love.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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