श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  3.20.108 
चतुर्थे - श्री - सनातनेर द्वितीय - मिलन ।
देह - त्याग हैते ताँर करिला रक्षण ॥108॥
 
 
अनुवाद
चौथे अध्याय में श्री चैतन्य महाप्रभु के साथ सनातन गोस्वामी की दूसरी मुलाकात का वर्णन है और बताया गया है कि किस प्रकार भगवान ने उन्हें आत्महत्या करने से बचाया।
 
The fourth chapter describes Sanatana Goswami's second meeting with Sri Chaitanya Mahaprabhu and how Mahaprabhu saved Sanatana from committing suicide.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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