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श्लोक 3.20.104  |
तार मध्ये शिवानन्द - सङ्गे कुक्कुर आइला ।
प्रभु तारे कृष्ण कहाञा मुक्त करिला ॥104॥ |
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| अनुवाद |
| उस अध्याय में शिवानन्द सेना के कुत्ते की घटना का भी वर्णन है, जिसे श्री चैतन्य महाप्रभु ने कृष्ण के पवित्र नाम का जप करने के लिए प्रेरित किया और इस प्रकार वह मुक्त हो गया। |
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| This chapter also mentions the incident of Shivananda Sen's dog, which was made to chant the holy name of Krishna by Mahaprabhu and thus the dog was liberated. |
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