श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  3.20.103 
प्रथम परिच्छेदे - रूपेर द्वितीय - मिलन ।
तार मध्ये दुइ - नाटकेर विधान - श्रवण ॥103॥
 
 
अनुवाद
प्रथम अध्याय में वर्णन है कि किस प्रकार रूप गोस्वामी ने श्री चैतन्य महाप्रभु से दूसरी बार मुलाकात की तथा किस प्रकार भगवान ने उनके दो नाटक [विदग्धा-माधव और ललिता-माधव] सुने।
 
The first chapter describes how Rupa Goswami met Sri Chaitanya Mahaprabhu for the second time and how Mahaprabhu listened to two of his plays (Vidagdha Madhava and Lalita Madhava).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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