एक वैष्णव को वेदांत-सूत्र पर चार संप्रदाय-आचार्यों, अर्थात श्री रामानुजाचार्य, माध्वाचार्य, विष्णु स्वामी और निम्बार्क द्वारा लिखी गई टिप्पणियों का अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि ये टिप्पणियाँ इस दर्शन पर आधारित हैं कि भगवान मालिक हैं और सभी जीव उनकी शाश्वत सेवा करते हैं। वेदांत दर्शन का सही तरीके से अध्ययन करने वाले को इन टिप्पणियों का अध्ययन अवश्य करना चाहिए, खासकर यदि वह वैष्णव हो। इन टिप्पणियों को वैष्णव हमेशा पवित्र मानते हैं। श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती की टिप्पणी का विस्तार से उल्लेख आदि-लीला, अध्याय सात, पाठ 101 में किया गया है। मायावादी टिप्पणी शारीरक-भाष्य एक वैष्णव के लिए जहर की तरह है। इसे बिल्कुल भी नहीं छुआ जाना चाहिए। श्रील भक्तिविनोद ठाकुर कहते हैं कि कभी-कभी एक महा-भागवत, या अत्यधिक ऊंचे भक्त, जिन्होंने कृष्ण के चरण कमलों में आत्मसमर्पण कर दिया है, अगर वह शारीरक-भाष्य का मायावादी दर्शन सुनता है, तो भी वह शुद्ध भक्ति सेवा से नीचे गिर जाता है। इसलिए सभी वैष्णवों को इस टिप्पणी से दूर रहना चाहिए।
