| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड » श्लोक 93 |
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| | | | श्लोक 3.2.93  | “सबे मे लि’ आइस, शुनि ‘भाष्य’ इहार स्थाने” ।
प्रेम - क्रोध करि’ स्वरूप बलय वचने ॥93॥ | | | | | | | अनुवाद | | भगवान आचार्य ने स्वरूप दामोदर गोस्वामी से गोपाल से वेदांत पर भाष्य सुनने का अनुरोध किया। हालाँकि स्वरूप दामोदर प्रेम के कारण कुछ क्रोधित होकर इस प्रकार बोले। | | | | The Lord requested Swarupa Damodara to listen to Gopal's commentary on Vedanta. But Swarupa Damodara, out of love, became somewhat angry and spoke as follows. | | ✨ ai-generated | | |
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