श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  3.2.83 
एइ त’ कहिलु गौरेर “आविर्भाव” ।
इहा ये इ शुने, जाने चैतन्य - प्रभाव ॥83॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य का वर्णन किया है। जो कोई इन घटनाओं के बारे में सुनता है, वह भगवान के दिव्य ऐश्वर्य को समझ सकता है।
 
Thus I have described the appearance of Sri Chaitanya Mahaprabhu. Anyone who hears of these events can understand Mahaprabhu's transcendental splendor.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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