|
| |
| |
श्लोक 3.2.82  |
शिवानन्देर प्रेम - सीमा के कहिते पारे ? ।
याँर प्रेमे वश प्रभु आइसे बारे बारे ॥82॥ |
|
| |
| |
| अनुवाद |
| शिवानन्द सेना के प्रेममय प्रसंगों से प्रभावित होकर श्री चैतन्य महाप्रभु बार-बार आए। अतः उनके प्रेम की सीमा का अनुमान कौन लगा सकता है? |
| |
| Impressed by the loving behavior of Sivananda Sen, Sri Chaitanya Mahaprabhu visited him repeatedly. So who can estimate the extent of his love? |
| ✨ ai-generated |
| |
|