श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  3.2.71 
तिन जनार भोग तेंहो एकेला खाइला ।
जगन्नाथ - नृसिंह उपवासी हइला” ॥71॥
 
 
अनुवाद
"उन्होंने अकेले ही तीनों देवताओं का भोग खाया है। इस कारण जगन्नाथ और नृसिंहदेव दोनों ही उपवास पर हैं।"
 
"He alone ate the offerings of all three idols. As a result, both Jagannatha and Lord Nrisimha remained hungry."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)