श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  3.2.56 
तबे ताँरे एथा आमि आनिब सत्वर।
निश्चय कहिलाड, किछु सन्देह ना कर ॥56॥
 
 
अनुवाद
"इस तरह मैं उसे बहुत जल्द यहाँ ले आऊँगा। निश्चिंत रहो, मैं सच कह रहा हूँ। शक मत करो।"
 
"That way I'll have them here soon. You can be sure I'm telling the truth. Don't doubt me."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)