| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड » श्लोक 47 |
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| | | | श्लोक 3.2.47  | एइ - मत मास गेल, गोसाञि ना आइला ।
जगदानन्द, शिवानन्द दु:खित हइला ॥47॥ | | | | | | | अनुवाद | | जब महीना बीत गया, लेकिन श्री चैतन्य महाप्रभु नहीं आये, तो जगदानंद और शिवानंद बहुत दुखी हो गये। | | | | When a month passed but Sri Chaitanya Mahaprabhu did not come, Jagadananda and Shivananda became very sad. | | ✨ ai-generated | | |
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