| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड » श्लोक 45 |
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| | | | श्लोक 3.2.45  | चलितेछिला आचार्य, रहिला स्थिर ह ञा ।
शिवानन्द, जगदानन्द रहे प्रत्याशा करिया ॥45॥ | | | | | | | अनुवाद | | अद्वैत आचार्य अन्य भक्तों के साथ जगन्नाथ पुरी जाने ही वाले थे, किन्तु यह संदेश सुनकर वे प्रतीक्षा करने लगे। शिवानन्द सेना और जगदानन्द भी श्री चैतन्य महाप्रभु के आगमन की प्रतीक्षा में वहीं रुक गए। | | | | Advaita Acharya was about to leave for Jagannatha Puri with other devotees, but upon hearing this message, he stopped. Shivananda Sen and Jagadananda also stayed behind, awaiting Sri Chaitanya Mahaprabhu's arrival. | | ✨ ai-generated | | |
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