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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 3: अन्त्य लीला
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श्लोक 43
श्लोक
3.2.43
जगदानन्द हय ताहाँ, तेंहो भिक्षा दिबे ।
सबारे कहिह, - ए वत्सर केह ना आसिबे ॥43॥
अनुवाद
"जगदानंद वहाँ हैं, और वे मुझे भोजन का प्रसाद देंगे। उन सबको सूचित कर दो कि इस वर्ष कोई भी जगन्नाथ पुरी न आए।"
"Jagadananda is there. He will give me alms of food. Tell them all that no one should come to Jagannath Puri this year."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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