श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.2.41 
ए - वत्सर ताँहा आमि याइमु आपने ।
ताहाइ मिलिमु सब अद्वैतादि सने ॥41॥
 
 
अनुवाद
“इस वर्ष मैं स्वयं बंगाल जाऊंगा और वहां अद्वैत आचार्य के नेतृत्व में सभी भक्तों से मिलूंगा।
 
“This year I will go to Bengal myself and meet all the devotees there including Advaita Acharya.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)