श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.2.38 
एक वत्सर तेंहो प्रथम एकेश्वर ।
प्रभु देखिबारे आइला उत्कण्ठा - अन्तर ॥38॥
 
 
अनुवाद
एक वर्ष श्रीकान्त सेना भगवान के दर्शन की बड़ी उत्सुकता से अकेले ही जगन्नाथ पुरी आये।
 
One year, Srikanta Sen came alone to Jagannath Puri with great eagerness to see Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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