श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.2.31 
‘गौर - गोपाल मन्त्र’ तोमार चारि अक्षर ।
अविश्वास छाड़, येइ करियाछ अन्तर ॥31॥
 
 
अनुवाद
"आप चार अक्षरों वाले गौर-गोपाल मंत्र का जाप कर रहे हैं। अब कृपया अपने भीतर के संशय त्याग दीजिए।"
 
"You chant the four-syllable Gauri Gopal mantra. Now let go of the doubts that reside within your mind."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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