श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.2.28 
चारि - दिके धाय लोके ‘शिवानन्द’ बलि ।
शिवानन्द कोन्, तोमाय बोलाय ब्रह्मचारी ॥28॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार लोग इधर-उधर दौड़ते हुए चारों ओर पुकारने लगे, "शिवानंद! जो कोई भी शिवानंद है, कृपया आइए। नकुल ब्रह्मचारी आपको बुला रहे हैं।"
 
People began running in all directions, shouting, "Shivananda! Whoever you are, Shivanand, please come. Nakula Brahmachari is calling you."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)