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श्लोक 3.2.23  |
परीक्षा करिते ताँर यबे इच्छा हैल ।
बाहिरे रहिया तबे विचार करिल ॥23॥ |
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| अनुवाद |
| नकुल ब्रह्मचारी की प्रामाणिकता की परीक्षा करने की इच्छा से वे इस प्रकार सोचते हुए बाहर ही रुक गये। |
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| With the desire to test the authenticity of Nakula Brahmachari, he stood outside thinking like this. |
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