श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.2.22 
चैतन्येर आवेश हय नकुलेर देहे ।
शुनि’ शिवानन्द आइला करिया सन्देहे ॥22॥
 
 
अनुवाद
जब शिवानन्द सेना ने सुना कि श्री चैतन्य महाप्रभु ने नकुल ब्रह्मचारी के शरीर में प्रवेश किया है, तो वे मन में संदेह लेकर वहाँ गये।
 
When Shivananda Sen heard that Sri Chaitanya Mahaprabhu had entered the body of Nakula Brahmachari, he went there with doubts in his mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)