श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.2.19 
अश्रु, कम्प, स्तम्भ, स्वेद, सात्त्विक विकार ।
निरन्तर प्रेमे नृत्य, सघन हुङ्कार ॥19॥
 
 
अनुवाद
वे निरंतर दिव्य प्रेम के शारीरिक रूपांतरण प्रदर्शित करते रहे। इस प्रकार वे रोते, काँपते, स्तब्ध हो जाते, पसीना बहाते, ईश्वर के प्रेम में नाचते और बादलों जैसी ध्वनियाँ निकालते।
 
He constantly reveals the physical manifestations of divine love. In this way they would cry, tremble, be stunned, drenched in sweat, dance under the influence of God's love and produce a sound like a cloud.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd