श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.2.18 
ग्रह - ग्रस्त - प्राय नकुल प्रेमाविष्ट हञा ।
हासे, कान्दे, नाचे, गाय उन्मत्त ह ञा ॥18॥
 
 
अनुवाद
नकुल ब्रह्मचारी बिल्कुल भूत-प्रेत से ग्रस्त व्यक्ति की तरह हो गए। वे कभी हँसते, कभी रोते, कभी नाचते और कभी पागलों की तरह जप करते।
 
The celibate Nakula became like a man tormented by ghosts. He would sometimes laugh, sometimes cry, sometimes dance, and sometimes sing like a madman.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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