श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 163
 
 
श्लोक  3.2.163 
‘हरिदास काँहा ?’ यदि श्रीवास पुछिला ।
“स्व - कर्म - फल - भुक्पुमान्” - प्रभु उत्तर दिला ॥163॥
 
 
अनुवाद
जब श्रीवास ठाकुर ने श्री चैतन्य महाप्रभु से पूछा, "कनिष्ठ हरिदास कहाँ हैं?" तो भगवान ने उत्तर दिया, "व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अवश्य प्राप्त होता है।"
 
When Srivasa Thakura asked Sri Chaitanya Mahaprabhu, “Where is little Haridasa?” Mahaprabhu replied, “One certainly receives the fruits of his fruitive actions.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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