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श्लोक 3.2.160  |
प्रयाग ह इते एक वैष्णव नवद्वीप आइल ।
हरिदासेर वार्ता तेंहो सबारे कहिल ॥160॥ |
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| अनुवाद |
| एक भक्त प्रयाग से नवद्वीप लौटा और उसने सभी को कनिष्ठ हरिदास की आत्महत्या का विवरण बताया। |
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| A devotee returned from Prayag to Navadvipa and gave everyone a detailed account of the suicide of little Haridasa. |
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