देखि’ त्रास उपजिल सब भक्त - गणे ।
स्वप्ने - ह छाड़िल सबे स्त्री - सम्भाषणे ॥144॥
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अनुवाद
यह उदाहरण देखकर सभी भक्तों में भय का भाव उत्पन्न हो गया, इसलिए उन्होंने स्वप्न में भी स्त्रियों से बात करना बंद कर दिया।
When all the devotees saw this example, they were filled with fear. Therefore, they all gave up talking to women, even in their dreams.
तात्पर्य
स्त्री-सम्भाषण के संबंध में श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर कहते हैं कि स्त्रियों से मिलने के वशीभूत होकर चाहे सूक्ष्म या स्थूल रूप से, बात करना सख्त मना है। महान नैतिक शिक्षक चाणक्य पंडित कहते हैं, मात्र-वत् पर-दारेषु। अतः न केवल त्याग एवं भक्ति सेवा से जुड़े व्यक्ति अपितु सभी को स्त्रियों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। दूसरों की पत्नी को अपनी माँ के समान समझना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥